
बातें कहीं भी शुरु हो जाती है. जंगली घास की तरह थोडी सी नमी में पनप जाती है. कभी गोल गोल घूम कर वहीं आ खडी हो जाती है....कभी यूं ही बरसात की तरह बरस जाती है. कभी खेतों सी लहलहाती है.....और उन पर अनाज से लगतें हैं किस्से. बातों बातों में अफसाने उग आते हैं.
शब्दों से संवरती हैं, आवाज़ के जायके में डूब कर ,जज़्बात के लिबास पहन इतराती हैं बातें. कभी हँसी का रस आता है....कभी उदासी हल्की सी लगी होती है. मुस्कुराती हैं बातें ,कभी सुबकती भी हैं ....हर बात को कहने की अदा अलग होती है....
बातें अनकही भी रह जाती हैं. कहने वाले के गले में जज़्बों के दलदल में घँसी.....जितना आवाज़ को थामने की कोशिश करती है...थोडी और गहराई में उतर जाती है. सुनने वाले की तरस किनारे पर खडी ....बेबस, लाचार.... बात को डूबते , दम तोडते देखती है. ऐसी बातों की आवाज़ नहीं होती. यह शब्दों के जेवर नहीं पहनती .... जुदा हुए साये की तरह....बेआवाज़ ....बस गूंज सुनाई देती है.
बात जो कहने से चूक जाती है.....उसकी पकड बहुत मज़बूत होती है. दलदल के नीचे से न निकालो तो मोक्ष का वरदान भी ऐसी बात के बोझ तले दब जाता है.....
कही नहीं जाती जो बातें......वही ज़्यादा सुनाई देती हैं...... भटक ऐसे यह जाती हैं....हर मोड पर मिल जाती हैं.....




8 comments:
बातें कहीं भी शुरु हो जाती है. जंगली घास की तरह थोडी सी नमी में पनप जाती है. कभी गोल गोल घूम कर वहीं आ खडी हो जाती है....कभी यूं ही बरसात की तरह बरस जाती है. कभी खेतों सी लहलहाती है.....और उन पर अनाज से लगतें हैं किस्से. बातों बातों में अफसाने उग आते हैं...
अच्छी लगी! आप भी बाते करते रहे.
सही कहा आपने हर मोड़ पर ऐसी कुछ बातें मिल जाती है
आपकी अनकही,बातों का स्वरूप बहुत अच्छा लगा ।
कुछ लोगो को पढ़ कर अच्छा लिखने पढने का हौसला मिलता है .....आप उनमे से एक है .....
कुछ बातें अनकही,
अभी अभी नहीं सूझीं,
लेकिन दबी रहीं.....
( एक चौराहे की बात )
"बातें अनकही भी रह जाती हैं."
अनकही बातो ने तो बहुत कुछ कह डाला.
मै समझ नही पा रहा हूँ कि मै गद्य पढ रहा हूँ या कविता.
बहुत सुन्दर भाव
लेखनी का जादू
बात की एक सुंदर एहसास बना कर प्रस्तुत किया आपने..धन्यवाद
बहुत सुन्दर बातें एक एहसास के रूप मे मन मे जिन्दा भी रह जाता है रहती हैं इन के पंख भी नहीम होते फिर भी इनकी उडान बहुत दूर तक होती है उस उडान को किसी की नज़र ना लगे इस लिये कुछ अनकाहाैऔर ये अनकाहा ही पनपने लगता है नहुत सुन्दर लिखा है शुभकामनायें
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