
लाल, पीला, हरा , नीला...कैसे कैसे तो फीके...कैसे चटकीले...कितने सारे रंग। याद है जब टेसू के फूलों से पानी में घुलता था रंग....और हाथों में लगाई मेहंदी पर शक्कर के पानी से चढ़ता था रंग। हल्दी और बेसन....चेहरे पर कैसे कैसे तो निखरता था रंग।
जब पहली बार इँद्रधनुष देखा तो सच में लगा था कोई कूची लेकर बैठा होगा...नहीं तो इतने बड़े आसमान पर कैसे तो उतरा होगा रंग। पता नहीं कब तो बंद आँखों के भीतर से भी दिखने लगे थे रंग। पुतलियों के नीचे से सरक काले को सरका कर हल्का हरा,नीला फिर नारंगी....। कब तो सीखा था...बेरंग हकीकत को सपनों से रंगने का हुनर ।
सूरज के मिज़ाज की तरह जिंदगी भी मन की घटाओं को रंगती जाती। कभी सफेद, उज्जव्ल....कभी अँधेरा सा काला.....लाल, गुलाबी,नारंगी, स्लेटी.... अलग अलग कितने रंग। प्रतिबिंब में बदलते थे रंग....और बिंबों में सजते थे रंग। कुछ आँखों में खुमार बन उमड़ते थे रंग.....कभी गालों पर सिमटते थे रंग...।
रंग भी तो कैसे होते हैं....कुछ पक्के होते हैं...कुछ यूँ ही उतर जाते हैं.....। ऐसे भी होते हैं रंग ....दाग बन उभर जाते हैं..।
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याद रहते हैं वो रंग....जो रूह पर निखर जाते हैं.....मुझ में घुल ...मेरे होने में शामिल......मेरा रंग बन जाते हैं....।
पूरे ब्लॉग परिवार को होली की शुभकामनायें।




14 comments:
होली की बहुत बहुत बधाई .......
होली मुबारक।
jeevan ke rangon ko holi me badalne ka andaaz khoob hai holi mubarak
बेजी आप को भी सपरिवार होली मुबारक
होली की हार्दिक शुभकामनाएँ...
शुभ होली
बीजी, आप को सपरिवार होली की शुभकामनाएँ!
आपको होली की मुबारकबाद एवं बहुत शुभकामनाऐं.
सादर
समीर लाल
जीवन में फागुन की छटा सदा रहे.
बहौत बहुत बधाई बीजी इस कविता की भी और होली की भी।
होली कैसी हो..ली , जैसी भी हो..ली - हैप्पी होली !!!
होली की शुभकामनाओं सहित!!!
प्राइमरी का मास्टर
फतेहपुर
बेजी, आप को, और आप के परिवार को होली की शुभकामनाएं !!
चौखट की तरफ से होली की आप व आपके परिवार को बधाई
रंगों भरी खूबसूरत रचना, बहुत सुन्दर लगी.
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