
सवाल हर तरह के हो सकते हैं। ऐसे जिनके जवाब सबको पता है। जैसे,"सूरज कहाँ से उगता है ?!" ऐसे भी जिनके जवाब खोजे जा सकते हैं, जैसे पृथ्वी की गोलाई...सबसे अच्छे टेनिस प्लेयर का नाम....सबसे बड़े तरबूज की जगह...रूस की सबसे लज़ीज मिठाई। सवालों के जवाब ढूँढना शोधकार्य हो सकता है...रिसर्च टॉपिक....और लोग जवाब की कोशिश में पी एच ड़ी हो जाते हैं...डॉक्टर कहलाने लगते हैं। कुछ सवाल का जवाब हम जानते हैं पर कहते नहीं... ,"मम्मी नाना नानी अकेले क्यूँ रहते हैं?!"..."यह ऐ फिल्म क्या होती है?!"....
सवाल पत्रकार पूछते हैं...छात्र पूछते हैं...राजनितिज्ञ पूछते हैं...प्रजा पूछती है....
सवाल पूछना आसान होता है। इसके लिए विषय की जानकारी की जरूरत नहीं होती। शोध अनिवार्य नहीं होता।
बस जरूरत होती है थोड़ी जिज्ञासा की....और सवाल पूछ लेने की....
बहुत से जवाब दे देकर जिंदगी में उम्र की दहलीज पार करता है इंसान....पर फिर भी रह जाते हैं कुछ सवाल... ऐसे सवाल जिनके जवाबों तक वह कभी नहीं पहुँच सका....
...और जब कोई यूँ ही चलते हुए इन्हे फिर उछाल देता है ... जवाब की तलब नहीं किंतु सवाल के प्रसंग में उठते हैं मन में और कई सवाल....
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सच तो यही है....इन अनुत्तरित सवालों ने ही रखी है भगवान और आत्मा पर आस्था की नींव....




5 comments:
bahot khub......
maine aapke blog dekhe ( jis me jane ki anumati nahi thi vo na dekh saka ) aache blog hai drishtikon ko follow karna chaaha par na kar saka (koi link nahi tha) feed ka bhi koi link nahi mila,khair blog mujhe pasand aaye aur khuda aapko kamyabi de aisi meri dua hai.
भगवान से उत्तरों की अपेक्षा करना या यह सोचना कि कोई तो सभी उत्तर जानता है, जीवन को सरल बना देता है। फिर भी प्रश्न तो वहीं के वहीं हवा में टंगे हमे मुँह चिढ़ाते रहते हैं।
घुघूती बासूती
बिल्कुल सटीक लिखा आपने............
बिलकुल सही....
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