Tuesday, December 30, 2008

गुजरता समय


गुजरा समय विदा होना चाहता है। जैसे मैं कोई ठहरा हुआ पड़ाव हूँ और वह मुझसे मिल कर आगे निकल जाना चाहता हो। जैसे हम चॉक और स्लेट की तरह मिले और कुछ शब्द, कुछ स्वर...कुछ खाके , कुछ लकीरें खींच कर फिर डस्टर से मिटा आगे के लिए साफ कर लें। समय को गुजर जाने की आदत है। उसे लगता है उसके पीछे से लोग नयी पुताई कर सब नया कर लेते हैं। पहले चूना फिर एशियन पेंट्स के नये तरीके के रंग...सब नया।

जब से होश सँभाला है एक ही कैनवास है.....। आटे में पड़ा हाथ , माँ की दुलार भरी चपत...पापा की उँगली...भाई की पतंग....। पहले प्यार के खिले फूलों के रंग....पहली जुदाई का गम....। ना जाने और कितने गहरे हल्के रंगों में सजी है यह कैनवास। करीब से देखने पर पहचानती हूँ हर गुजरे समय को। समय जो रंग छोड़ गये ....जिनपर मैं कोई पुताई नहीं कर सकी।

समय पर हमेशा मैं चित्र बनाती रही। रंग चढ़ाती रही। पर ये कभी नज़र नहीं आये। हर साल यह यूँ ही परायेपन के साथ गुजर जाता है.....

मेरे पुराने कैनवास पर कुछ नये निशान छोड़कर...

11 comments:

Amit said...

सही में गुजरता समय अपनी यादें छोड़ जाता है ..बहुत सही लिखा है

सुशील कुमार छौक्कर said...

शब्दों के भाव बडे ही प्यारे। अद्भुत। नववर्ष की ढेरों शुभकामनाएं।

Nirmla Kapila said...

बहुत ही नाजुक से अहसास हं नववर्ष मुबारक हो

swati said...

bahut achha likha hai beji.....aapko meri or se nav-varsh ki shubhkaamnayen aur joel ko uske janmdin par dher saara pyaar aur aasheervaad

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

इस गद्य काव्य को वर्षांत की सौगात मान कर सहेज रहा हूँ।

नीरज गोस्वामी said...

बहुत कमाल का लिखा है आपने..वाह.
नीरज

नीरज गोस्वामी said...

बहुत कमाल का लिखा है आपने..वाह.
नीरज

अफ़लातून said...

क्रिसमस की belated शुभ कामनाएं । नया साल मुबारक ।

विनय said...

नववर्ष की हार्दिक मंगलकामनाएँ!

Pramod Singh said...

सलिल चौधुरी वाला वह लता का गाया गाना नहीं याद आ रहा- 'न जाने क्‍यूं होता है ये ज़ि‍न्‍दगी के साथ, अचानक ये मन..'? इतना बहका हुआ है कहां से याद आयेगा. इसीलिए मैं भी गानों को सुनने से बचता हूं, पता नहीं क्‍या-क्‍या कहां-कहां की तस्‍वीरें दिमाग़ में बजने लगती हैं, फिर मन में जो कुछ बजना शुरू होता है, उससे, आह, कैसी दुश्‍वारियां बढ़ जाती हैं! नहीं बढ़तीं?

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

नव -वर्ष मँगलमय हो -सादर स्नेह व अनेकोँ बधाई एवँ शुभकामनाएँ
- लावण्या