
उनसे मिलना हुआ था जैसे किसी और महाद्वीप से आई हवा हो। मैं रुकी थी थोडी और गहरी साँस लेने के लिए। उसकी खुशबू में जैसे उस मिट्टी की सौंधी खुशबू थी जहाँ से मैं विस्थापित हुई थी। जानती थी मैं इस महाद्वीप का हिस्सा हूँ। मेरे पास अपनी ज़मीन थी, जिसका मौसम और मिज़ाज अलग था। मैं द्वीप के उस टुकड़े सी थी जो पानी के पास था। जो गीला था और जहाँ दूसरे किनारे की कई सौगाते बिखरी पड़ी थी। उस नन्हे पौधे की तरह जिसका बीज शायद दूसरे महाद्वीप से ही तैरते पहुँचा हो और अब यहाँ का हिस्सा हो गया हो। मेरे और उनके बीच एक समंदर था... लहरें थी जो उनके आसपास की तरंगें मुझ तक पहुँचा रही थी।
उन्हे देखा तो लगा वो एक भरे पूरे बूढ़े बरगद से थे। हरे भरे अपनी जड़ो के भीतर अपनी झुर्रियों के बीच एक अजीब सी उदासीनता से घिरे हुए। मेरी तरफ मुड़ा चेहरा स्नेहासिक्त था। ऐसा लगा था बहुत पहले से मैं उन्हे जानती हूँ। जैसे पहचान मेरे अंतरंग को तो याद थी पर मेरी यादाश्त से गुम थी।
मुझे लगा था वे मुस्कुराये थे। और एक पल को लगा था कि काश मैं सचमुच कोई छोटी सी चिड़िया होती जो उनकी ड़ाल में सुरक्षित किसी घोंसले में रहती। उनकी आँखें नम थी। उस नमी में देखा था मैने अपना स्वरूप। बरगद का ही एक कमज़ोर और बौना स्वरूप। बौखलाई थी अपना ही चेहरा देखकर। पता नहीं कैसे बरगद पर उगती हैं जटायें, कैसे उभरती हैं झुर्रियाँ....। मैं तैयार नहीं थी।
जब पूछा था...मिलोगी मुझसे। कुछ अहंकार में ही कहा था...अरे नहीं...किस लिए। मेरे अहंकार का स्वर मेरे अंतरंग की आवाज़ से ऊँचा था। उनकी आवाज़ मुस्कुराई थी। जैसे जानती हो कि फिर लौटूँगी उन तक अपनी पहचान खोजते हुए।
कुछ वक्त बीता है। मेरी जड़ें कुछ भीतर उतरी हैं। कुछ चिड़ियों ने मेरी टहनियों पर घोंसले बनाये हैं। मेरी हरी ड़ालियाँ भूरी हुई हैं.....उभरी हैं उनपर हल्की रेखायें....
आज हवा फिर उस महाद्वीप से इस तरफ ही चली है....वही खुशबू फिर मेरे अस्तित्व में घुली है......
...........और मैं उनसे मिलना चाहती हूँ।




6 comments:
मन की भावना को सुंदर शब्द के माला में पिरोकर प्रस्तुत्कारने के लिए बधाई,
सशक्त प्रस्तुतीकरण है.
अहंकार जब ढलता है तो वास्तविकता की परते खुलने लगती हैं।
पेशकश और शब्द चुनाव, वाह!
सुन्दर भावों से भरी आजकी पोस्ट अच्छी लगी। काफी दिनों के बाद यह पोस्ट पढने को मिली।
शब्दों का अच्छा मिश्रण किया है आपने अच्छा प्रस्तुतिकरण
आपकी लेखनी मे सरलता है यह देख अच्छा लगा। शुभकामना।
*****EXCELLENT
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