Tuesday, December 2, 2008

आई हैव नो रिग्रैट्स

मुंबई के ब्लास्ट्स के शोक के बीचोबीच मेरा ध्यान खींचा उस नौजवान आतंकवादी ने जिसने कहा उसे किसी बात का अफसोस नहीं है। निहत्थे निर्दोष लोगों की बेवजह जान लेने का अफसोस उसे क्यूँ नहीं है?!! उसकी आत्मा मर गई है या उसका दिमाग काम नहीं करता?!! उसके आँखों से टपकती नफरत में जनून था....और एक तेज़ दिमाग....


हम कब तक बीमारी छोड़ लक्षणों से जूझेंगे?!! क्या हम थोड़ा सा समय भी इन नौजवानों की मानसिकता समझने में नहीं लगायेंगे?!!


आतंकवाद को मिटाने के लिये आतंकवादी की मानसिकता समझना पहली सीढ़ी है।

आम आदमी को आतंकवादी बनाने के पीछे के कारणों को समझने की मेरी कोशिश......






http://www.youtube.com/watch?v=GHHVUtYfIGc



http://www.youtube.com/watch?v=xlBhWs1sti0





जब मुझे लगता है
मैने जो किया सही है
फिर उसकी वजह से
कुछ गलत ही
क्यों ना हुआ हो...

जब मुझे दर्द होता है
और आक्रोश में
करती हूँ वार
उसपर...जो मुझे लगता है
मेरा दुश्मन...

जब घेर लेते हैं
न्याय के प्रहरी
और माँगते हैं
सही और गलत का हिसाब
और साबित करते हैं
मुझे गलत....

जब मैं चाहती हूँ
कोई देखे मुझपर बीते
अन्याय को
और महसूस कर सके
मेरे रिसते घावों का दर्द
तब करती हूँ मैं एक चोट...

और तब कटघरे में
खड़े रहने पर
अपना जुर्म कबूल कर
कहती हूँ
चीख कर
"आई हैव नो रिग्रैट्स"

8 comments:

ranjan said...

नौजवानों की मानसिकता? ये कैसी मानसिकता?

रंजना said...

sahi kaha aapne.beemari jad me hai,patton ko nochte rahne se kuchh nshi hoga.
Aakhir wah koun si manodhasha hai jisme auron ka lahoo bahakar hi santosh milta hai ,yah to sochna hi hoga.Bina uske nidan ke vidhwansh ko nahi roka ja sakta.

डॉ .अनुराग said...

२ साल के नन्हे बच्चे के माँ बाप को उसके जन्मदिन पर यातना देकर मारने पर .......एक औरत ओर दो छोटे बच्चो को जला कर मार देने पर . ऐसी भीड़ पर जिसमे घर लौटता कोई आदमी है.जिसका इन्तजार करते उसके बच्चे है ....सपने बुनता कोई मजदूर है....या नौकरी से लौटती कोई माँ.....अपनी पेंशन लेकर घर लौटता कोई बूढा..अंधाधुन्द गोली चलाने पर......"आई हैव नो रिग्रैट्स"

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

आप की कविता और हिम्मत की दाद देता हूँ। इस वक्त सही मर्म पर हाथ रखा है आप ने।
दुनिया से दहशतगर्दी जब उठाई जाएगी तब समूची दहशतगर्दी उठाई जाएगी।

cmpershad said...

जब ब्रेनवाशिंग की जाती है तो उस व्यक्ति का एक ही ध्येय होता है और उसे ही वह सब कुछ समझने लगता है। जब उसे इस मानसिकता में डाल दिया गया तो फिर उसकी मानसिकता को पढ़ना क्या?

PD said...

मैं भी नौजवानों में से ही आता हूं.. मेरे कुछ मुसलिम मित्र भी नौजवान ही हैं.. यहां सवाल यह होना चाहिये कि इन नौजवानों को कैसे संस्कार इनके मां-बाप दिये हैं?

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

Very True - The first Clip was amazing - I heard the brain washing that these terrosits get -- This IMRAN kept saying Our BABRI MASJID -- Which was built by BABAR -- WHO came in INDIA & tore down a Temple --
It is who lived in INDIA first ?
The Hindus or BABAR ?
& Who owns this land ?
Why not make it anto a HOSPITAL to treat ALL human beings --
Good post Beji --

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said...

ये कैसी मानसिकता?
प्राइमरी का मास्टर