Wednesday, August 20, 2008

दृष्टिकोण

मैं जिस कोने पर खड़ी हूं वहाँ से ऐसा दिखता है। कैसा दिखता है?.... और जैसा भी दिखता है क्या जरूरत है दृष्टि के इस कोण को दिखाने की। मेरे और किसी के भी दृष्टिकोण का महत्व क्या है ....और इसे बिना पूर्वाग्रहों के देखना क्यों जरूरी?

....अगर सामने की चीज़ छोटी हो तो उलट पुलट कर हर ऐंगल से उसकी तस्वीर बनाई जा सकती है। तोड़ फोड़ जोड़ गुना कर जाना जा सकता है की चीज़ क्या है, क्यों है, कैसी है। हर कोई इसे अपनी समझ के हिसाब से अर्थ दे सकता है। इस अर्थ का व्यक्ति की समझ, बुद्धि और भावना से संबंद्ध हो सकता है लेकिन दृष्टि से नहीं।

पर अक्सर बातों का , विषयों का विस्तार बहुत होता है। सैटलाइट इमेजस की तरह जरूरी है अलग अलग दृष्टि से देखे गये दृष्यों को स्कैन कर , सुपरइम्पोस कर समझने की चेष्ठा की जाए की दृष्य वास्तव मे है क्या। धीरे धीरे ही सही...लेकिन दृष्य के डायमेंशंस....हर आयाम से परीचित होने की कोशिश हो।

हर दृष्टिकोण का महत्व है क्योंकि एक कोने से देखा गया सच कभी संपूर्ण नहीं हो सकता।

1 comments:

Udan Tashtari said...

हर दृष्टिकोण का महत्व है-सत्य वचन!!