Tuesday, August 5, 2008

केरल के एक गाँव में बारिश में भीगा सा...














बारिश में भीग सकता है मन
आसमाँ से मिली नमी...
उधार की बूंदों की तरह
पँखुड़ियों में
सहेजी जा सकती है....

नमी सोखने के लिए
जड़ों की जरूरत होती है....



11 comments:

Nitish Raj said...

अच्छी तस्वीरों का संग्रह है।

नीरज गोस्वामी said...

नयनाभिराम चित्र...बेहद दिलकश रचना के साथ...
नीरज

Parul said...

नमी सोंकने के लिए
जड़ों की जरूरत होती है. yaqeenan...badi khuubsurat jagah hokey aayin hain aap.. ..:)

Pramod Singh said...

करेक्‍शन ठेलोअड: नमी 'सोखने'..

Beji said...

करेक्शन डन...प्रमोदजी।

दिनेशराय द्विवेदी said...

जड़ें जरूरी हैं जी। चित्र मनोहर हैं।

Udan Tashtari said...

सुन्दर चित्र.

Lavanyam - Antarman said...

Beautiful pic.s Beji - The First Pic of the Yellow Flowrrs is of the Butter cups ' am i correct ?
Do write their names...
rgds,
L

मीत said...

क्या बात है बेजी जी. Seem to have drenched yourself to the hilt. Beautiful photos ... and this one :

नमी सोंकने के लिए
जड़ों की जरूरत होती है.

सजीव सारथी said...

वाह बेजी, क्या लजाब तस्वीरें हैं और प्रस्तुतीकरण हमेशा की तरह ...शायराना

बाल किशन said...

नयनाभिराम चित्र...बेहद दिलकश रचना के साथ...