Saturday, August 2, 2008

एनिग्मा

एक तरंग से उत्पन्न असीम लहरें...और उन लहरों के झूलों पर उछलते हुए कितने बुलबुले...हवा को बाजुओं में भर..कुछ देर के लिए उनमें रंग भर फिर से सतह पर...तरल मात्र..

आशय... हर बुलबुले का आशय होना चाहिए। विज्ञान, सिद्धान्त और प्रकृति के नियम के अनुरूप....

आशय उन लहरों और बुलबुलों का भी होना चाहिए जो उसकी आँखों में लगातार उठती गिरती है....

सपनीली आँखों में गहरी उतरती इन लहरों में आशय ढूँढे कैसे...?!

2 comments:

Nitish Raj said...

गहरी डूबी पंक्तियां, खूब...
सुंदर...अति उत्तम।।।

mahashakti said...

बहुत अच्‍छी पक्तिंयाँ