Monday, January 14, 2008

बोध

"तू सबसे अलग क्यूँ है?!...ज्यादा सुनती है....कितना हँसती है...फिर रो देती है....तेरी बाते समझ से बाहर है...भाव पढ़कर रूठ जाती है,शब्द अनसुना करती है...."


"एक और एक दो
दो और दो चार
चार गुणा दो आठ
आठ के चार भाग दो.....

तुम्हे नहीं लगता शून्य किसी गणितज्ञ ने नहीं खोजा होगा....कितनी अलग बात थी....पाई की असली वैल्यू क्या है.....??

कहाँ ऐस्ट्रोनॉट ऐस्ट्रौलोजर बन जाते है जानते हो....??

ये कुत्ते सन्नाटे में क्या सुन कर उठ जाते हैं....??.

अजीब है पूरे समंदर के बीच में हो...फिर भी तरंगों को महसूस नहीं करते....!!"

2 comments:

Parul said...

भाव पढ़कर रूठ जाती है,शब्द अनसुना करती ...kitni pyaari baat kahi aapney....ladkiyaan aisii hi to hotin hain....magar kyu?

Sanjay Gulati Musafir said...

कुछ उत्तर मुझे मालूम हैं -

शून्य आत्मबोध ने खोजा था
पाई की सही वैल्यू है 'खोया' - जितना खुद को खोई उतना 'पाई'

ऐस्ट्रोनॉट वहाँ ऐस्ट्रॉलोजर बन जाते हैं जहाँ वे पाते हैं कि खगोलीय सिद्धांत ही तो ज्योतिष के मूल सिद्धांत हैं। या वहाँ जब वे पाते हैं जहाँ वे आज पहुँचे हैं वहाँ कोई ज्योतिषी कभी आ चुका है।

पूरे समंदर में तरंगे महसूस इसलिए नहीं होती क्योंकि हम उठ्ती-गिरती कहरों की माया से भर्माए रहते हैं। पूरे समंदर से खुद में समेट कर उठ्ती-गिरती लहरों को देखो - तरंगे महसूस होंगी।

जल में कुंभ है, कुंभ में जल है
टूट गया कुंभ, जल ही जल है

कुत्ते चेतना की हलकी आहट से भी जाग जाते हैं और हम जो इंसान होने का दावा करते हैं...

सविनय
संजय गुलाटी मुसाफिर