
जो हुआ अच्छा हुआ....जो हो रहा है अच्छा हो रहा है....जो होगा अच्छा ही होगा....
मेरे जीवन के महामंत्र जैसा था। दिशा चुनने की जिम्मेदारी से मुक्त होने का एक आसान तरीका।
मैं उस बच्चे की तरह हूँ जो बस में सवार है...मालूम है कि कहीं जा रहे है....पर कहाँ कुछ पता नहीं...हर हाल में मज़े करना शौक है...और किस्मत से बस अच्छी है....
यहाँ वहाँ जब बस ठहर जाती है, मैं नज़र दौड़ा लेती हूँ....हाँ बड़ा सुंदर समा है...
बेजी , तुम कवियित्री हो....लेखिका...मैं आसपास देखने लगती हूँ....क्या हूँ बिल्कुल अंदाज़ा नहीं है किन्तु यह नहीं हूँ....। बेचैन हूँ...अचानक बस में बैठे बैठे सयानी हो गई हूँ....चिन्ता हो रही है बस कहाँ जा रही है...मासूमियत खो रही हूँ....पूछने लगी हूँ जो हो रहा है क्यों हो रहा है....
बस शुरु कहाँ हुई थी पूरा नक्शा सामने रख कर सोच रही हूँ.... सब पुराने गुजरे पड़ाव फिर जी आई हूँ शायद कम्पास मिल जाये... बस नहीं रुकी...चली जा रही है...मेरे साथ तो सब अच्छा ही हो रहा है....
बेचैनी किस बात की है...कोई सम टोटल एफेक्ट ऑफ हॉरमोनल इंम्बैलेंस...कुछ सपने जो पूरे नहीं हुए...या एक इमेज में रहने की घुटन....
लिखना मेरे लिये किसी गुप्त कोड को डिकोड करने जैसा है...अक्सर नहीं जानती क्या लिखने जा रही हूँ....तरंगों का अनुवाद शब्दों में हो सके इस लिये अपने दिमाग का लिमिटेड शब्दकोष सामने रख देती हूं....लिख कर पढ़ कर देखती हूँ कि क्या चाहती हूँ....
मुझे कौन पढ़ रहा है, मैं किस को पढ़ रही हूं.....कुछ निश्चित नहीं है,नियंत्रित नहीं है, अनुशासित नहीं है....कुछ ऊर्जा है जो या तो तीव्र होगी या क्षीण....
मैं अपनी अवस्था बदलना चाहती हूँ....
ड्राइवर की सीट पर बैठना चाहती हूँ....रास्ते का अंदाज़ा लगाना चाहती हूँ,पड़ाव निश्चित करना चाहती हूँ....
डैमिट वेयर ऐम आई ट्रैवलिंग टू....फॉर गॉड्स सेक गीव मी ए क्ल्यू?!
मम्मी पापा से मिलने जा रही हूँ...साथ ही बीते कुछ और पलों से भी.... पज़ल के सब टुकड़े मिल जाये तो तस्वीर शायद साफ नज़र आये.....
लेट मी सी इफ आइ कैन मेक सेंस आउट ऑफ दिस इन न्यू इयर!!
नया साल आप सभी के लिये शुभ हो!!
मेरे जीवन के महामंत्र जैसा था। दिशा चुनने की जिम्मेदारी से मुक्त होने का एक आसान तरीका।
मैं उस बच्चे की तरह हूँ जो बस में सवार है...मालूम है कि कहीं जा रहे है....पर कहाँ कुछ पता नहीं...हर हाल में मज़े करना शौक है...और किस्मत से बस अच्छी है....
यहाँ वहाँ जब बस ठहर जाती है, मैं नज़र दौड़ा लेती हूँ....हाँ बड़ा सुंदर समा है...
बेजी , तुम कवियित्री हो....लेखिका...मैं आसपास देखने लगती हूँ....क्या हूँ बिल्कुल अंदाज़ा नहीं है किन्तु यह नहीं हूँ....। बेचैन हूँ...अचानक बस में बैठे बैठे सयानी हो गई हूँ....चिन्ता हो रही है बस कहाँ जा रही है...मासूमियत खो रही हूँ....पूछने लगी हूँ जो हो रहा है क्यों हो रहा है....
बस शुरु कहाँ हुई थी पूरा नक्शा सामने रख कर सोच रही हूँ.... सब पुराने गुजरे पड़ाव फिर जी आई हूँ शायद कम्पास मिल जाये... बस नहीं रुकी...चली जा रही है...मेरे साथ तो सब अच्छा ही हो रहा है....
बेचैनी किस बात की है...कोई सम टोटल एफेक्ट ऑफ हॉरमोनल इंम्बैलेंस...कुछ सपने जो पूरे नहीं हुए...या एक इमेज में रहने की घुटन....
लिखना मेरे लिये किसी गुप्त कोड को डिकोड करने जैसा है...अक्सर नहीं जानती क्या लिखने जा रही हूँ....तरंगों का अनुवाद शब्दों में हो सके इस लिये अपने दिमाग का लिमिटेड शब्दकोष सामने रख देती हूं....लिख कर पढ़ कर देखती हूँ कि क्या चाहती हूँ....
मुझे कौन पढ़ रहा है, मैं किस को पढ़ रही हूं.....कुछ निश्चित नहीं है,नियंत्रित नहीं है, अनुशासित नहीं है....कुछ ऊर्जा है जो या तो तीव्र होगी या क्षीण....
मैं अपनी अवस्था बदलना चाहती हूँ....
ड्राइवर की सीट पर बैठना चाहती हूँ....रास्ते का अंदाज़ा लगाना चाहती हूँ,पड़ाव निश्चित करना चाहती हूँ....
डैमिट वेयर ऐम आई ट्रैवलिंग टू....फॉर गॉड्स सेक गीव मी ए क्ल्यू?!
मम्मी पापा से मिलने जा रही हूँ...साथ ही बीते कुछ और पलों से भी.... पज़ल के सब टुकड़े मिल जाये तो तस्वीर शायद साफ नज़र आये.....
लेट मी सी इफ आइ कैन मेक सेंस आउट ऑफ दिस इन न्यू इयर!!
नया साल आप सभी के लिये शुभ हो!!











