Saturday, December 22, 2007

दुबई में बलॉगर मीट के बहाने से

हिन्दी ब्लॉग जगत से जुड़ना अपनेआप में एक अनुभव रहा है। शब्दों में इतनी ताकत होती है कि वह इंसान की परतें बहुत आसानी से खोल देता है। हर नाम से...फिर चाहे वो बेनाम ही क्यों ना हो ....एक व्यक्तित्व जुड़ जाता है। शब्दों में जो दिखता है हम चेहरे में तलाशने की कोशिश करते हैं।

ब्लॉगर मीट काफी प्रचलित हो निकला है। जो लिखते हैं वो बहुत अच्छे से जानते हैं कि वो अपने ही शब्दों से दिखते नहीं हैं। जब वास्तव में मिलना होता है तो पज़ल के बाकी पीसस फट हाथ लग जाते हैं। यू ए ई में दुबई में हाईकू बहाना बनी। मीनाक्षी जी और अर्बुदा ने पूर्णिमाजी के नेतृत्व में मिलने का आयोजन किया। विध्याधरजी और स्वाती से शब्दों जितनी पहचान भी नहीं थी। दुबई का पौश इलाका...ग्रीन्स..जहाँ अर्बुदा और मीनाक्षीजी रहती हैं मिलना तय हुआ।
जयसन (लाल शर्ट में) मुझे और बच्चों को लेकर ग्रीन्स पहुँचे। वहाँ गौरव (सफ़ेद शर्ट) ,अर्बुदा के पति से मुलाकात हुई। पूर्णिमाजी अपने पति(आसमानी शर्ट) प्रवीणजी के साथ पहले ही पहुँच चुकी थी। हम हाईकू के बारे में सोचने समझने पार्टी हॉल में पहुँचे। और ब्लॉगर्स के पति पहली बार एक ही हालत से गुजरने वाले लोगों से मिल रहे थे। वे इस विमर्श में जुट गये कि ब्लॉगिंग रोग है कि नहीं। बहुत जल्द उकता कर जिन्दगी के अन्य पहलुओं पर बात होने लगी और फिर बच्चों की खिलखिलाहट के बीच चाय, दफ्तर और दोस्ती।



बच्चे बहुत खुश थे। स्लाइड्स, पार्क , दोस्त और पापा। दिस वास देयर डे। गुड़िया बीच में दौड़ कर आकर बोली ...योर मेरी कठपुतलियाँ फ्रेन्ड्स आर नाईस। जोयल भी बहुत खुश था। खेलने के लिये अर्बुदा के जुड़वा बच्चे ईशान और इला और मीनाक्षी जी के दोनो बेटे वरुण और विद्युत।



वरुण और विद्युत भी इस आक्रमण से खुश नज़र आ रहे थे। घर के हर कोने में बच्चे और खिलौने पहुँच रहे थे। विद्युत ईशान को सँभाल रहा था और वरुण मम्मी की ब्लॉगिंग के साईड एफेक्ट्स देखकर मंद मंद मुस्कुरा रहा था।





जयसन का ध्यान वरुण और विद्युत ने तुरंत खींच लिया। वरुण शांत और संयत व्यक्तित्व और विद्युत का एलक्ट्रीफाइंग प्रेसेंस। वरुण की रुचि कविता, गिटार और चेस। विद्युत की रुचि ड्रम्स, ग्राफिक्स और पेन्टिंग। जयसन और दोनों का संवाद काफी देर तक चला। जयसन इस उम्र में इनकी सोच और समझ से प्रभावित हो रहे थे। कोशिश में लगे थे की जाने इसमें से कितनी सोच इनकी अपनी है और कितनी यहाँ वहाँ से उठाई हुई।विद्युत अपने पेन्टिंग्स का कलेक्शन दिखा रहा था। जयसन समझ रहे थे की इन बच्चों के पास ना सिर्फ समझ है बल्कि अपनी एक मौलिक सोच है। जीवन का यह खूबसूरत पड़ाव जहाँ सपने , आदर्श और दिशा का महत्व सबसे अधिक होता है। आवाज़ बदल जाती है और अंदाज़ की तलाश होती है।





वरुण को प्रकृति से प्यार है। हर बात को गहराई से सोचना उसकी आदत।









विद्युत का हाथ कलाकार का है। पेप्सी और कोक के डिब्बे भी उसके हाथों में कलाकृति का आकार ले लेते हैं।





इला और ईशान अर्बुदा के जुड़वा बच्चे हैं। इला चंचल है और ईशान नटखट और बातूनी। आंटी, अंकल,भैया ,दीदी और हाँजी कहते कहते बहुत जल्द हम सबके दिल से जुड़ गया।
जोयल वरुण के साथ चेस खेलते खेलते अय्ययो करूँ मैं क्या सुकु सुकु गा रहा था। वरुण जोयल की चाल पर हैरान था। करीबन बीस मिनट तक खेल चला फिर जोयल को मात दी।
गुड़िया बूगी वूगी के ताल पर नाचती रही। वह अपने आप में ही खुश थी।
इस दौरान हमारी बातचीत चल रही थी। हाईकू, भाषा, ब्लॉगिंग,हिन्दी...कई बातों पर चर्चा हुई। स्वाती लिखने की तरफ काफी गंभीर नज़र आई। अर्बुदा अपनी सुंदर मुस्कुराहट से जबतब रौशनी बिखेरती रही। मीनाक्षी जी का ध्यान खान पान और बाकी व्यवस्था पर था। विद्याधर जी कश्मीर और कश्मीरी पंडितों के बारे में बात कर रहे थे।
पूर्णिमाजी बिल्कुल अध्यापिका लग रही थी। विकी, अनुभूति, हाईकू और ब्लॉगिंग सब एकदम सहजता से समझा रही थी।
मीटिंग खत्म कर जब पहुँचे तो जयसन हाईकू और सुडुकू का अंतर समझना चाहते थे। बहुत सँभलकर पूर्णिमाजी से हिन्दी में बात करते रहे। गौरव इस दौरान बाकियों को चाय पिला चुके थे। और ईशान पूर्णिमा जी के पति की गोदी में कमफर्टेबली सीटड था।
वे सभी किसी एक रोग से ग्रसित रोगियों की फैमिली के सपोर्ट ग्रूप की तरह एक दूसरे को दिलासा और सहानुभूति दे रहे थे।स्वाती और पूर्णिमाजी को जल्दी थी सो वे जल्दी निकल गये।
हम पीछे रह गये। देखते ही देखते यह साथ घनिष्टता में बदलने लगा। पूरे परिवार के सभी लोग एकदूसरे में रम रहे थे। काफी अर्से बाद ऐसा होता देख रही थी। हर सदस्य अलग था और साथ रह कर खुश।
मीनाक्षी जी और अर्बुदा ने खाने के लिये रोका। हम इससे पहले कि उनके विचार बदले, जल्दी से मान गये। मीनाक्षी जी ने वाईन लीफ में चावल की फिलिंग कर स्टार्टर्स बनाये। चिकन और मटन भी फट तैयार हुआ। अर्बुदा के किचन में चावल, रोटियाँ, सूप, दाल और मटर पनीर पका। हम मेहमान नवाज़ी का आनंद ले रहे थे। भूख ,खाने की महक से बढ़ गई।
जब दस बजे सब टेबल के आसपास बैठे, नई दोस्तियाँ पनप चुकी थी। ईशान जयसन की गोदी में सो गया। जोयल का बुर्ज आल आरब से बड़ा होटल ब्लॉक्स से तैयार था। इला बिस्तर में जाकर सो गई। गुड़िया की पूरियाँ खिलौनों के बरतनों मे तल रही थी।
हम तीनों बिछड़ी सहेलियों की तरह मिल कर बेहद खुश थी और बात बेबात मुस्कुरा रही थी। जयसन और गौरव अपने बचपन के किस्से सुना रहे थे। वरुण डॉक्टर्स के जीवन के उतार चढ़ाव के बारे में जानना चाहता था। विद्युत दुबई और सउदी अहब में पले बच्चों का अंतर बता रहा था।
एक शाम ...ब्लागिंग का साइड इफेक्ट....नये रिश्तों की बुनियाद बन चुकी थी।

15 comments:

RC Mishra said...

बधाई हो!
पूर्ण महिला-ब्लॉगर मीट आयोजित और प्रसारित करने के लिये। बहुत बढि़या रहा।

arbuda said...

बेजी, मान गये आपको। उस शाम को हूबहु अपने शब्दों में ढाल कर आपने बड़ी ही सुन्दर रचना बनाई है। बधाई।
मीटिंग के साथ साथ गेट टूगेदर जैसा आनन्द भी मिल और नये दोस्त भी। शुक्रिया।
हाँ, सभी हाईकु(त्रिपदम)भी आपने अतिसुंदर लिखे हैं। दिल खुश हो गया पढ़ कर।

anitakumar said...

बहुत अच्छा लगा पढ़ कर, मिनाक्षी जी को हम जानते हैं ब्लोग के जरिए, आज उनके बेटों का भी परिचय मिल गया खाने की खुशबु यहां तक आ रही है और आप लोगों की नयी पनपी दोस्ती की भी

Sanjeet Tripathi said...

बधाई तो दे ही चुका हूं, फिलहाल यहां आपके लेखन की तारीफ़ करना चाहूंगा, कितने अच्छे शब्दों में विवरण दिया है मानों पढ़ने वाला खुद वहां रहा हो।

Raviratlami said...

"मीनाक्षी जी ने वाईन लीफ में चावल की फिलिंग कर स्टार्टर्स बनाये। चिकन और मटन भी फट तैयार हुआ। "

इस मीट में तो वाकई मीट तैयार हो गया. जाहिर है, मीट होते रहना चाहिए...

parul k said...

bahut achacha laga sabko aur kareeb se jaan kar.aapney to itna achacha byoraa diya ki mun lalch gaya..vaisey meenakhsh di, se laduungi ab ..arey cam hi on kar detin to hum bhi join kar letey ye meet...

vijayshankar said...

बड़ा ही प्रवाहपूर्ण लेखन किया है आपने. वर्णन में आत्मीयता झलकती है. वैसे भी घरेलू वातावरण बनने में महिलाओं को तो जैसे वरदान मिला हुआ है. आपकी भाषा में सजीवता है. बधाई.!

Aflatoon said...

शानदार आयोजन और जबरदस्त रपट के लिए हार्दिक शुभेच्छा । किसमस और नये साल की बधाई भी।

मीनाक्षी said...

बहुत खूब बेजी... फुर्सत के पहले पलों की इस शाम में उस शाम का सजीव चित्रण और त्रिपदम पढ़कर पहले से भी ज़्यादा आपके लेखन का लोहा मानने लगे हैं...इतने सुन्दर त्रिपदम पढकर तो सूझ ही नहीं रहा कि किन शब्दों में तारीफ करूँ.... आजकी भागदौड़ की ज़िन्दगी में अगर ब्लागर मीट के माध्यम से नई दोस्ती जन्म लेती है तो इससे बढ़कर कोई आनन्द ही नहीं...हमें तो प्यारी सी दोस्त बेजी पूरे परिवार समेत मिली है.
अनिता जी जल्दी ही आपसे रूबरू मुलाकात होगी.
पारुल , दीदी भी कहती हो और लड़ना भी चाहती हो...अगली बार ब्लागर मीट कैम पर कर लेंगे.

yunus said...

कमाल है । एक साथ इतनी सारी ब्‍लॉगराईनें । तब तो बातें भी खूब हुई होंगी और मीट भी ।
अच्‍छा है । पढ़कर बहुत मजा आया ।

अजित वडनेरकर said...

बहुत बढ़िया रपट। ये ब्लागर मीट तो सचमुच इधर वालों के लिए भी यादगार हो गई।

अभय तिवारी said...

भई वाह.. खूब लिखा आपने.. पूरा माहौल सजीव उपस्थित हो गया.. कुछ भी छूटा नहीं.. पढ़ कर अच्छा लगा..

कंचन सिंह चौहान said...

aisi reports padh kar ham khud bhi shamil ho jate hai us meet me.n.

thanks

mamta said...

जितनी सुन्दर फोटो उतनी ही सुन्दर रिपोर्ट ।

बहुत बहुत बधाई इस खूबसूरत ब्लॉगर मीट की ।

अनूप शुक्ल said...

वाह, बहुत अच्छा लगा इस मुलाकात का विवरण पढ़कर। खासकर ये वाक्य-हम तीनों बिछड़ी सहेलियों की तरह मिल कर बेहद खुश थी और बात बेबात मुस्कुरा रही थी। आप लोग ऐसे ही बेबात मुस्कराती रहीं।