Sunday, December 9, 2007

प्रात:काल झलक दिखला जा

(सुबह साढ़े पाँच बजे)

नेगी आउट हो गये । चलो अच्छा हुआ। वैसे भी शायद उन्हे डान्स करना नहीं आता।

हाँ । चारों में सबसे कमज़ोर वही थे।

मैं चाहता हूँ,प्राची जीत जाये।

भला क्यूँ?!

अच्छा नाचती है।

संध्या बेहतर नाचती है।

नाचती है पर बिल्कुल विनम्र नहीं है।

विनम्रता का नाचने से क्या संबंध?

संबंध है।

कैसा?!

कोई किसी भी चीज़ में अच्छा हो लेकिन विनम्रता एक ऐसा गुण है जो होना चाहिये।

आप जिसे घमण्ड समझ रहे हैं वह घमण्ड नहीं गर्व है। अपने गुण पर गर्व करना गलत है?

हाँ अगर किसी को ठेस पहुँचती हो तो…

ठेस पहुँचती ही क्यूँ है जो अच्छा है वो पूरे विश्वास और अभिमान से मस्तक ऊँचा करके खड़ा हो तो बुराई क्या है?

प्राची विनम्र है....अंग भी फिज़ूल में दिखाना पसंद नहीं करती...कुलीनता के लक्षण हैं यह।

दिस इस एबसर्ड...पहली बात तो संध्या ने कपड़े कभी इनएप्रोप्रियेट पहने ही नहीं....दूसरी बात प्राची कैब्रे करती है वो भी पूरे कपड़ों में....हू इस इनएप्रोप्रिएट....ऐन्ड हैविंग डबल स्टैन्डर्ड्स….सच तो यह है कि प्राची बच्ची है...अपनी रूमानियत से बाहर नहीं निकली....आप देखते रहिये कैसे पँख पहनेगी आगे ....वैसे भी बैक डोर एन्ट्री है....


प्राची दिन ब दिन बेहतर होती जा रही है...क्या तुम इस बात से इंकार कर सकती हो?

नहीं लेकिन मैं कौन कितनी तेजी से बेहतर हो रहा है नहीं देख रही....परफौर्मेन्स के दौरान कौन बेहतरीन है यह देख रही हूँ

संस्कार और पोटेन्शियल हो तो अच्छा बेहतर हो सकता है.....बेहतरीन हो सकता है
पोटेन्शियल देखने की क्या जरूरत है जब परफौरमेंस सामने हो...
कुछ भी हो...अगर बात पब्लिक वोटिंग पर है तो पब्लिक के नज़रिये को ध्यान में रखना होगा...

आपको क्या लगा...मैं प्राची और संध्या की बात कर रही हूँ...मैं पब्लिक की ही बात कर रही हूँ। जिनकी मानसिकता श्रेष्ठतम को भी सिर झुकाये ही देख सकती है। जो बेहतरीन को सामान्य के सामने सर झुकाने को बाध्य कर देते हैं। विनम्रता की आड़ में एक तरह से जबरदस्ती आदर की अपेक्षा करते हैं। अगर हम चाहते हैं की आगे जायें तो हमें इस मानसिकता को बदलना होगा। श्रेष्ठता जिस गुण में देखी जा रही है उस गुण को आंक सकने की अक्ल होनी चाहिये। आप खाना बनाने की कोई प्रतियोगिता करें तो क्या देखेंगे...खाने का स्वाद.पौष्टिक तत्व, बनाने की विधी, उसे परोसने की अदा,उसका रंग, महक, खुशबू….बनाने वाले के सौंदर्य से क्या लेना देना?

हाँ अगर खाना कोई और परोस रहा हो तो कोई लेना देना नहीं है। लेकिन अगर परोसने वाला भी वही है तो उसकी खूबसूरती भी मायने रखती है।
यहाँ तो हमें यह ग्रीन रूम ले जा रहे हैं, बिना मेक अप दिखा रहे हैं, उनका परिचय करवा रहे हैं....तुम्हे किसने कहा की सिर्फ डान्स की प्रतियोगिता है...?

बच्चों का दूध उबाला?

हाँ

पानी की बोतल भरी?

हाँ, मैं नहा के आता हूँ

(नास्ते के टेबल पर)....देखो घना कोहरा है,गाड़ी पहले ऑन करके थोड़ी देर रखना,फिर चलाना...ध्यान से...पार्किंग लाईट ऑन करके

वैसे जीतेगी तो प्राची ही....

आई कार्ड लिया...और पर्स...

शर्त?!

हाँ (हारकर) जब तक आप जैसे ही लोग हों वही जीतेगी....

तुम वोट करोगी?
मुझे और कोई काम नहीं है…

आप?

(एक शरारती मुस्कान के साथ) तुम्हे क्या लगता है ?!

6 comments:

मीनाक्षी said...

कमाल है बेजी... आज यह नया रूप .. रॉबिन शर्मा की लिखी 'The Monk Who Sold His Ferrari'याद आ गई जिसमे जिक्र है कि आदमी के दिमाग में हर रोज़ औसतन 60,000 सोचें आती जाती रहती है... अज यहाँ देख लिया.... नृत्य, सौन्दर्य, विनम्रता, घमण्ड/गर्व, संस्कार, उबलता दूध , गर्म होता पानी, कोहरे में पार्किंग लाइट की सावधानी..वोटिंग , शर्ते... और क्या क्या .... व्यंग्य , हास्य, सीख और .... आज आपकी नई झलक दिखी.. :) शुभकामनाएँ

बाल किशन said...

अच्छा लिखा आपने.
मुझे लगता है संध्या ही जीतेगी क्योंकि कुछ दिनों से इन सब मामलों मे आजकल मुझे जो लग रहा है वही हो भी रहा है.
पहले तमांग फिर अनिक और फिर इस्मित.
इस बार शायद संध्या.

Sanjeeva Tiwari said...

कोई भी जीते पर आपने यहां जो लिखा वो कमाल का है, जो नच देखते हैं और वोटिंग करते हैं उन्‍हें यह विचार बताना ही होगा । पर इसे बताने के बजाए पढाना ज्‍यादा प्रभावपूर्ण होगा, यही तो शव्‍दशिल्‍प है धन्‍यवाद बेजी जी ।

Pramod Singh said...

क्‍या बात है.. कितनी बात है!

aarchi said...

ye apne aap se vivad tha ya bharvasio ki soch..
par jo thi wo 1 dum satik or sach.
garv jyada nahi bhata jitna ubhrta huaa kamjor vinamr.
shubhkamnaye..

जोशिम said...

प्राची जीत गई :-) - अगले संस्करण का इंतज़ार :-)