Monday, August 13, 2007

स्वाद


यह हवा नमकीन क्यूँ है??
इसमें तेरे आँसू मिले हैं
या पसीना घुला है?!!

5 comments:

vishesh said...

शानदार...

Udan Tashtari said...

अरे, यह तस्वीर तो कलकत्ता की लगती है.

प्रियंकर said...

या तो म्हारे कलकत्ते की फोटू दीखै . अठ्यां को पसीनो और बीको'इ नमक .

Mired Mirage said...

कुछ उत्तर नहीं देते बनता। मुझे याद है छात्र जीवन में हमलोग साइकिल रिक्शा के बदले आटो रिक्शा लेना पसन्द करते थे। कारण यही कि उनपर बैठकर सवारी करना अमानवीय लगता था । पर एक बार एक साइकिल रिक्शा वाले ने समझाया कि उन्हें भूखा रखना और भी अमानवीय था ।

घुघूती बासूती

Nishikant Tiwari said...

सामने सब के स्वीकार करता हूँ
हिन्दी से कितना प्यार करता हूँ
कलम है मेरी टूटी फूटी
थोड़ी सुखी थोड़ी रुखी
हर हिन्दी लिखने वाले का
प्रकट आभार करता हूँ
आप लिखते रहिए
मैं इन्तज़ार करता हूँ ।
NishikantWorld